Saturday, September 11, 2010

उनकी ख़ुशी...

मेरे बगैर भी अब वो खुश रहता है......
याद करता नहीं मगर याद रहता है.......
मेरी बरबादियो का जश्न मैं क्यूँ ना करूँ ....
उन्ही की खातिर तो वो आबाद रहता है.....
मेरे अश्क ख़ुशी का सबब हैं मेरी ....
उन्ही से यार मेरा दिलशाद रहता है.....

4 comments:

  1. मेरे अश्क ख़ुशी का सबब हैं मेरी ....
    उन्ही से यार मेरा दिलशाद रहता है.....

    bohot khoob...

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  2. बहुत खूब।

    आपको और आपके परिवार को तीज, गणेश चतुर्थी और ईद की हार्दिक शुभकामनाएं!
    फ़ुरसत से फ़ुरसत में … अमृता प्रीतम जी की आत्मकथा, “मनोज” पर, मनोज कुमार की प्रस्तुति पढिए!

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  3. bahut umda keep it up!

    YE KAH RAHA HE WO HICHKIYA LEKAR
    DEEWANA HU MUJHE HASNA YAAD RAHTA

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